इस देश का युवा वर्ग संख्या की दृष्टि से तो विश्व में सबसे बड़ा है लेकिन युवा-चित्त के लक्षण तो कम ही नज़र आते है|

परीक्षाओं में पास होने या गर्लफ्रेंड को पाने के लिए मंदिरों और दरगाहों पर धागे बंधवाता कैसे युवा हो सकता है?

देश में आज भी जहाँ 120 million लोग भूखे सोते हो वहाँ धर्मगुरुओं और धर्मस्थलों पर लाखों के अभिषेक करवाता चादरे चढ़वाता कैसे युवा हो सकता है?

मज़हबों और धर्मों के नाम पर लाखों मासूमों की बलि देखने के बाद भी उसी दकियानूसी सोंच का गुलाम कैसे युवा हो सकता है?

विज्ञान जहाँ चाँद पर पहुँच गया है वहीँ शुभ महूर्त और चौघड़ियाँ देख कर अपने काम करने वाला किस तरह युवा कहलाने के लायक है?

अगर युवा हो तो अपने वैज्ञानिक चित्त का प्रदर्शन करों, अपने आसपास पसरी असमानता, वर्गभेद और धर्मभेद की खाई को भरने का प्रयास करों| अपने बच्चों , परिवारों और मित्रों को नफ़रत के सुनहरे सम्मोहन से निकालो और एक नए भारत और नए विश्व का नागरिक बनने की और क़दम बढ़ाओ|