वो पहली ईद

और आज ईद का मौका था। दिन याद करने का उसको; जिसके लिए कहा गया है "रब्बिल-आलमीन" और छोटा रहीम दौड़कर घर में घुसा तैयार हो रहे अब्बू की टांगो से लिपट कर बोला “अब्बू अजान हो रही है मैं भी चलूंगा”बाप की आंखें छलक आई मस्जिद में आज मेरे बच्चे की पहली नमाज होगी मेरे साथ या-अल्लाह, मॉं ने खुश होकर दोनों को जानमाज़ देकर रुखसत किया और आज मस्जिद तो जैसे चार गुनी हो गई थी लोगों ने एक साथ जब उसके सदके में सर झुकाया तो जैसे सातवें आसमान से आवाज आई कुबूल है-कुबूल है नमाज़ ख़त्म करके अपने रहीम अपने अब्बू के साथ खड़ा हुआ ही था की एक जोरदार धमाके ने पूरा मंजर बदल दिया मौत का काला धुँआ जब थोड़ा सा छटा तो वहाँ न रहीम था और ना उसके अब्बू था तो बस चीखों का पुकारों का महासागर नमाजियों का खून जमीन पर बहता हुआ नफरत की नई ईबारत लिख रहा था। झुलसी, अधजली लाशों के बू ने मस्जिद के लोबान को भी कमज़ोर कर दिया था। घरों से दौड़ कर आए रिश्तेदार अपने लोगों की लाशें ढूंढने में लगे थे। रहीम की रोती-बिलखती मॉं अपने लाडले को ढूंढ रही थी और अचानक उसे ठोकर लगी॥ नीचे देखा तो जमीन पर एक धड़ था खून से सना पैरों में नई चप्पल थी।जो अब्बू ने रहीम को ईद पर खरीद कर दी थी और तभी दूर कहीं पड़ोसी मुल्क की वादी में एक टूटे से घर का फोन बजा सामने से आवाज आई मुबारक हो भाई जान मिशन फतेह हुआ॥

भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक की अनसुनी कहानी

मित्रो आइये आपको आज एशिया के पहले और विश्व के दूसरे वैज्ञानिक जिन्होंने टेस्ट ट्यूब बेबी का सफल कारनामा अंजाम दिया। इनका नाम था डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय। बेहद अफ़सोस की बात है की उनके कार्य को उनके जीते जी सम्मान नहीं मिला और उनकी मृत्यु के २७ सालों के बाद उनके काम को सराहा गया । डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को उनकी रिसर्च में श्री सुनीत मुखर्जी और श्री एस. के. भट्टाचार्य मदद कर रहे थे । डॉ. सुभाष ने टेस्ट ट्यूब बेबी की सबसे सफलतम और आसान तकनीक खोजी थी। लेकिन उनके जीवन काल में उनके काम को अर्थहीन ही समझा गया। उस समय की तथाकथित विशेषज्ञ कमेटी जिसमे gynaecologist, psychologist, physicist और एक neurologist थे और जिसकी अध्यक्षता एक radio physicist , उनमे से किसी को आधुनिक प्रजनन तकनीकों के बारे में कुछ भी नहीं पता था और न ही उसमे से किसी ने ये जानने की कोशिश की। उलट उस कमेटी ने डॉ सुभाष मुखोपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाए। जिसमे सरकारी अनुमति के बिना अपनी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का तथा टेस्ट ट्यूब में भ्रूण पैदा कर सकने के दावों को असंभव और आधारहीन बताया। इन आरोपो का मुख्य कारण डॉ सुभाष की स्पष्टवादिता और गलत कार्यो में सरकारी अफसरों का साथ न देना था। कमेटी ने डॉ सुभाष को उनकी रिसर्च को बाहर भेजने और जापान में उस समय आयोजित होने वाली अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में जाने से भी रोक दिया। उत्पीडन की हद तो तब हुई जब इस प्रतिभावान वैज्ञानिक को हमारे ही देश के इन लोगो ने तबादला कर नेत्र विशेषज्ञता के विभाग में भेज दिया। डॉ सुभाष अपने साथ हो रहे इन उत्पीड़नों और अपमान को सहन नहीं कर पाये और सन 1981 में उन्होंने दुःखी होकर आत्महत्या कर ली। आपको जानकर और भी आश्चर्य होगा की विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक…

क्या पुर्वजन्मों के पापो से बच्चे अपंग पैदा होते है? एक पड़ताल

दुःख है की आज के वैज्ञानिक युग में भी करोड़ो लोग बच्चों के जन्म के समय से आई अपंगता को उसके पूर्व जन्मो के पापो का परिणाम मानते है । इन शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं को भाग्यवाद की इस कड़वी गोली के साथ जोड़ देने का परिणाम है की भारतीय समाज अब तक न तो उन अक्षम-अपंग बच्चों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ पाया है और न ही भावी माता-पिता इन अक्षमताओं के सही कारण को जानकर स्वयं की जीवन शैली में कोई सुधार कर पाए है। सोचने की बात यह है की अगर ईश्वर पापो के बदलें में अपंगता देता है तो विदेशो में तो पाप अधिक होते है फिर भी हर साल वहाँ जन्मजात अपंगता के ग्राफ में गिरावट हो रही है।इसका कारण किसी विशेष पूजा-पाठ या अनुष्ठान नहीं , बल्कि जन्मगत अपंगताओं के पीछे के विज्ञान को समझ कर उनके कारणों को दूर करना है। एक समय था जब WHO के मुताबिक १२५ देशो में हर साल ३,५०,००० से ज्यादा बच्चे पोलियो का शिकार होकर अपंग हो जाते थे। दुनियाँ के अधिकतर देशों ने इसके खिलाफ विज्ञान और जागरूकता की ऐसी लड़ाई छेडी के सन २००० तक अधिकतर देशो ने अपने राष्ट्र से पोलियो को उखाड़ फेका लेकिन भाग्य की लकीर पिटता हमारा देश इतने व्यापक प्रचार कार्यक्रम के बाद भी २०११ में जाकर पोलियो मुक्त देश का दर्जा हासिल कर पाया। इसका साफ कारण है -बच्चों की इस कष्टकारी परिस्थिति को विज्ञान के स्थान पर भाग्य के साथ, पूर्व जन्मो के फल के साथ जोड़कर देखना। लेकिन आज विज्ञान ने यह साबित कर दिया है की बच्चों की इस जन्मजात अपंगता चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, का कारण माता-पिता के गुणसूत्र (jeans) की गड़बड़ी, माता का कुपोषण और कई मामलों में गर्भकाल के दौरान माता का अशुद्ध खानपान और दिनचर्या भी हो सकता…

देश बदलता है- A Poem by Rishi Aacharya

देश बदलता है तो कुछ, सीनों में आग मचलती है चोर, उच्चको और लुटेरों की नींदे उड चलती है। जनता देख रही है सारे धूर्त और मक्कारों को भारत माँ को बेच चुके इस देश इन गद्दारों को ॥ भारत बंदी तो केवल छोटा सा एक बहाना है मंशा इनकी है की केवल अपना धन बचवाना है। काले धन के खड़े विरोधी काली नियत से साले ६० साल में भारत ने कितने साँप बग़ल में थे पाले ॥ काले धन की रोटी खाकर जिनके बच्चे पलते है कहना होगा उनमे से कुछ भारत बंद को चलते है। एक अकेला शेर खड़ा हो कर के जब चिल्लाता है फटा कलेजा फिर गीदड़ का खुद में मुँह में आता है।। आगे आने वाली पीढ़ी देगी जूतों के माला नेताजी और सेठाजी अब पड़ा तुम्हारा भी पाला। जाओ खाली करो तिज़ोरी , फेकों जितना संभाला एक तरफ खाई है दूजी और खुदा है अब नाला॥ दान धरम और पूण्य करम के दिन फिर वापस आये है गाँव के बूढ़े रामदीन ने, फिर से दिए जलाए है। दल के दल दल से उठकर सब गीत ख़ुशी के गाये है बंद नहीं अब सदा चलेगा भारत , मोदी आये है ॥ ऋषि आचार्य।      

ईश्वर की चिट्ठी

दुनियाँ की बगड़ती हालत को देखकर ईश्वर को एक दिन दया आ ही गयी| उसने सोचा - दुनियाँ वाले बेचारे मेरे संदेशो को शायद भूल गए है| उन्हें फिर से याद करवाना चाहिए| यह सोचकर उसने विश्व के चुनिंदा चर्चो, सिनगॉगो, मदिरों और मस्जिदों के धर्माधिकारियों को चिट्ठी लिखी| मेरे प्यारे धर्माध्यक्षों शायद आप मेरे दिए गए आदेशों को भूल गए हो इसलिए फिर से एक कॉपी भेज रहा हूँ , मूसा को मैंने यही आदेश हज़ारों सालों पहले सनाई पर्वत पर खुद लिख कर दिए थे , आशा है आप अपने पास आ रही जनता को इस बारे में ठीक ठीक समझा दोगे | यह दस आदेश इस प्रकार थे: १. तुम मेरे अलावा किसी अन्य भगवान को नहीं मानोगे २. तुम मेरी किसी तस्वीर या मूर्ती को नहीं पूजोगे ३. तुम अपने प्रभु भगवान का नाम अकारण नहीं लोगे ४. सैबथ का दिन याद रखना, उसे पवित्र रखना ५. अपने माता और पिता का आदर करो ६. तुम हत्या नहीं करोगे ७. तुम किसी से नाजायज़ शारीरिक सम्बन्ध नहीं रखोगे ८. तुम चोरी नहीं करोगे ९. तुम झूठी गवाही नहीं दोगे १०. तुम दूसरे की चीज़ें ईर्ष्या से नहीं देखोगे   टिपण्णी १ - हफ़्ते के सातवे दिन को सैबथ कहा जाता था जो यहूदी मान्यता में आधुनिक सप्ताह का शनिवार का दिन है। चिठ्ठी पाकर धरती पर खलबली मच गयी , मंदिरों, चर्चो और मस्जिदों में रातो-रात मीटिंग हुई| बहुत सोच विचार करने के बाद सब ने ईश्वर को एक कॉमन पत्र भेज दिया| पत्र कुछ यों था - ओ दुनियाँ के बनाने वाले हमारे प्रणाम स्वीकारे| प्रभु जो दस आज्ञाएँ आपने मूसा को दी थी वे हमें याद है लेकिन ज़माने के हिसाब से थोड़ा फेरफार करना पड़ा इसलिए हर आदेश के साथ हमारी टिप्पणी लिख कर भेज रहे है| १. तुम मेरे अलावा किसी अन्य…