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सर आइज़क न्यूटन – असाधारण प्रतिभा का धनी एक शख्स जिसने बदल डाली दुनिया

जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ना शुरू करते हैं तो सबसे पहले जिस वैज्ञानिक का नाम आता है, वो हैं – न्यूटन(Newton)। यूँ तो दुनियां में बहुत से लोग जन्म लेते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा हमेशा के लिए अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिख जाते हैं। जब तक इस धरती पे

भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक की अनसुनी कहानी

मित्रो आइये आपको आज एशिया के पहले और विश्व के दूसरे वैज्ञानिक जिन्होंने टेस्ट ट्यूब बेबी का सफल कारनामा अंजाम दिया। इनका नाम था डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय। बेहद अफ़सोस की बात है की उनके कार्य को उनके जीते जी सम्मान नहीं मिला और उनकी मृत्यु के २७ सालों के बाद उनके काम को सराहा गया

फेंगशुई एक धोखा, भारत को बचाइए

दोस्तों यह किस्सा मेरे नए मकान लेने की खुशी में दी गई पार्टी का है। किसी बड़े शहर में खुद का मकान होना मानो एक सपने की तरह होता है। और अगर यह सपना आपकी जवानी में ही साकार हो जाए तो खुशी दुगुनी हो जाती है। मेरे परिवार ने भी इस खुशी को बांटने

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कहानी – सफेद गुड़

दुकान पर सफेद गुड़ रखा था. दुर्लभ था. उसे देखकर बार-बार उसके मुंह से पानी आ जाता था. आते-जाते वह ललचाई नजरों से गुड़ की ओर देखता, फिर मन मसोसकर रह जाता. आखिरकार उसने हिम्मत की और घर जाकर मां से कहा. मां बैठी फटे कपड़े सिल रही थी. उसने आंख उठाकर कुछ देर दीन

क्या पुर्वजन्मों के पापो से बच्चे अपंग पैदा होते है? एक पड़ताल

दुःख है की आज के वैज्ञानिक युग में भी करोड़ो लोग बच्चों के जन्म के समय से आई अपंगता को उसके पूर्व जन्मो के पापो का परिणाम मानते है । इन शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं को भाग्यवाद की इस कड़वी गोली के साथ जोड़ देने का परिणाम है की भारतीय समाज अब तक न तो

मक्सिम गोर्की की कहानी – वह लड़का

यह छोटी-सी कहानी सुनाना काफी कठिन होगा-इतनी सीधी-सादी है यह! जब मैं अभी छोटा ही था, तो गरमियों और वसन्त के दिनों में रविवार को, अपनी गली के बच्चों को इकट्ठा कर लेता था और उन्हें खेतों के पार, जंगल में ले जाता था। इन पंछियों की तरह चहकते, छोटे बच्चों के साथ दोस्तों की

कविता कृष्ण पल्लवी की कविता -सच को जानना

जो लोहा गलाते हैं और धरती खोदकर खनिज निकालते हैं और अनाज उपजाते हैं, उनकी ज़ि‍न्‍दगी कब्रिस्‍तान जैसी होती है, आँखें पथरायी रहती हैं और सपनों को दीमक चाटते रहते हैं और सूझ-बूझ को लकवा मारे रहता है जबतक कि वे बँटे रहते हैं खण्‍ड-खण्‍ड में जाति, धर्म और इलाके के नाम पर और जबतक

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की कहानी – ऐसे ही किसी दिन

अनुवाद – ‘मनोज पटेल’ आठ बजे के बाद खिड़की से आसमान को देखने के इरादे से, वह थोड़ी देर के लिए रुका और उसने देखा कि दो विचारमग्न बाज बगल के मकान की शहतीर पर धूप ले रहे थे। वह इस खयाल के साथ फिर काम में जुट गया कि दोपहर के खाने के पहले

भारत को आज़ादी क्या सिर्फ़ भारत की जनता के स्वतंत्रता आंदोलन और धरने प्रदर्शन से मिली? क्या आप भी यही मानते है?

निश्चित ही स्वतंत्रता या क्रांतिकारी परिवर्तनों के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। स्वतंत्रता के लिए पांच वर्ष तक सतही तैयारी कर मजदूर,गुलाम,किसान,पादरी,वकील और सरकारी कर्मचारियों ने मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका में एक वर्ष तक एक हज़ार वर्गमील क्षेत्र में अंग्रेजों से सतत् संघर्ष करना पड़ा। फ़्रांस के लोग सात साल तक रक्त से सनी लड़ाई

सामाजिक चेतना के अग्रदूत – संत रैदास

संत कुलभूषण कवि रविदास उन महान सन्तों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान किया। इनकी रचनाओं की विशेषता लोक-वाणी का अद्भुत प्रयोग रही है जिससे जनमानस पर इनका अमिट प्रभाव पड़ता है। मधुर एवं सहज संत रैदास की वाणी ज्ञानाश्रयी होते हुए भी ज्ञानाश्रयी एवं प्रेमाश्रयी शाखाओं के मध्य