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रोग दूर भगाएँ-भाँति-भाँति के प्राणायाम. Pranayamas and their effects on health

प्राणायाम एक प्रकार से प्राण के आयाम में जाकर किया गया व्यायाम है। इससे समस्त अंग-अवयवों को शक्ति मिलती है। वे स्वस्थ-सबल बनते हैं। इसलिए योगशास्त्रों में स्वास्थ्य-संवर्द्धन के लिए प्राणायाम को एक अति उत्तम उपाय गया है। इसमें स्थूल से लेकर सूक्ष्मशरीर तक को प्रभावित करने की सामर्थ्य है, अतएव इसे आध्यात्मिक उपकारों में

Children story बाल निर्माण की कहानी घनश्याम की वीरता

‘तुम्हें रुपये देने हैं या नहीं’ क्रुद्ध आवाज में दीवान भीमराव भी चिल्ला रहे थे। ‘मैं जल्दी ही दे दूँगा। इस बार सूखा पड़ गया इसलिए नहीं दे पाया। आपने तो मेरी सदा ही सहायता की है। थोड़ी दया और कीजिए साहब।’ दोनों हाथ जोड़कर गरीब कृषक कह रहा था। ‘मैं कुछ नहीं जानता। बस

बच्चों की भागीदारी और प्राथमिकताओं के चयन में मीडिया की भूमिका

*एकलसंस्कृतिकरण की प्रक्रिया के दौरान रोज़मर्रा के जीवन में बच्चों की भागीदारी और प्राथमिकताओं के चयन में मीडिया की भूमिका* 🖌हाली ओज़गुनर व दुइगू चुकूर (तुर्की)* (यह लेख बच्चों पर मीडिया के प्रभाव के विश्लेषण पर केन्द्रित है। इसमें अभिव्यक्त विचार लेखकों के अपने विचार हैं। -सं.)**1. परिचय* पूँजीवाद सत्ता में आने का और तकनोलॉजी

दोपहर का भोजन Story by Amarkant Ji Dophar ka Bhojan

हमने हिन्‍दी कथाकार अमरकांत की कहानी ‘डिप्‍टी कलेक्‍टरी’ प्रस्‍तुत की थी। आज प्रस्‍तुत है उनकी दूसरी प्रसिद्ध कहानी ‘दोपहर का भोजन’* सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रख कर शायद पैर की उँगलियाँ या जमीन पर चलते चीटें-चीटियों को देखने लगी। अचानक उसे मालूम हुआ

देश बदलता है- A Poem by Rishi Aacharya

देश बदलता है तो कुछ, सीनों में आग मचलती है चोर, उच्चको और लुटेरों की नींदे उड चलती है। जनता देख रही है सारे धूर्त और मक्कारों को भारत माँ को बेच चुके इस देश इन गद्दारों को ॥ भारत बंदी तो केवल छोटा सा एक बहाना है मंशा इनकी है की केवल अपना धन

डॉ अम्बेडकर और भारत के बहुजन

डॉ भीमराव अम्बेडकर के बारे में लोग उन्हें सिर्फ सविधान निर्माता और दलितों की आजादी के मसीहा के रूप में जानते है। उनके द्वारा किये गए वो अविस्मरणीय कार्य जो दलितों के लिए नहीं अपितु सबके लिए थे:- 1. सरदार पटेल के तीव्र विरोध के बावजूद उन्होंने महिलाओ सहित सभी को वोट का सवैधानिक अधिकार

शिकागो के शहीद मज़दूर नेताओं की कहानी- १ मई – मजदूर दिवस पर विशेष

  १ मई – मजदूर दिवस पर विशेष अपने संघर्ष के दौरान मज़दूर वर्ग ने बहुत-से नायक पैदा किये हैं। अल्बर्ट पार्सन्स भी मज़दूरों के एक ऐसे ही नायक हैं। यह कहानी अल्बर्ट पार्सन्स और शिकागो के उन शहीद मज़दूर नेताओं की है, जिन्हें आम मेहनतकश जनता के हक़ों की आवाज़ उठाने और ‘आठ घण्टे

The Exorcism Of Emily Rose का सच

 विश्व की कुछ चुनिंदा हॉरर फिल्मों की लिस्ट में The Exorcist और The Exorcism Of Emily Rose का नाम शायद ही कोई भूल सके| जिसने भी इस फिल्म को देखा है उसे शैतान की ताक़त का वो मंज़र देखा होगा की अंधेरे कमरे से एक बार तो डर लगा ही होगा| लेकिन बहुत कम लोग

समाजवाद क्यों?(Why Socialism?) – अल्बर्ट आइंस्टाइन (1949)

टिप्पणी : यह बात शायद कम ही लोग जानते है की अल्बर्ट आइंस्टीन एक महान वैज्ञानिक होने के साथ साथ एक मुखर नास्तिक और समाजवादी चितंक भी थे| परमाणु ऊर्जा पर किये उनके शोध का अमरीका द्वारा दुरूपयोग करने पर वे स्वयं को हिरोशिमा और नागासाकी में हुई मौतों का भी जिम्मेदार मानने लगे थे|

समाजवाद और धर्म

हस्ताक्षर : एन. लेनिन नोवाया झिज्न, अंक 28, 3 दिसंबर, 1905 संग्रहीत रचनाएं, खंड 10, पृष्ठ 83-87 वर्तमान समाज पूर्ण रूप से जनसंख्या की एक अत्यंत नगण्य अल्पसंख्यक द्वारा, भूस्वामियों और पूँजीपतियों द्वारा, मज़दूर वर्ग के व्यापक अवाम के शोषण पर आधारित है। यह एक ग़ुलाम समाज है, क्योंकि “स्वतंत्र” मज़दूर जो जीवन भर पूँजीपजियों